घड़ी क्या है, किसने बनाई और घड़ी कितने प्रकार की होती है
घड़ी (Watch) आज हमारे जीवन का ऐसा हिस्सा बन चुकी है, जिसके बिना दिन की कल्पना करना भी मुश्किल है। सुबह अलार्म की आवाज़ से लेकर रात को सोने से पहले आख़िरी बार समय देखने तक, घड़ी हर कदम पर हमारे साथ रहती है। स्कूल जाना हो, ऑफिस पहुँचना हो, ट्रेन पकड़नी हो या फिर किसी ज़रूरी मीटिंग में समय पर पहुँचना हो – हर जगह घड़ी हमारी मदद करती है।
घड़ी क्या है? | What is Watch (Time Measuring Device)
घड़ी एक ऐसा यंत्र है, जिसकी मदद से हम समय को मापते और समझते हैं। यह हमें बताती है कि अभी कितना समय हुआ है और हमें अपना अगला काम कब करना चाहिए।
घड़ी समय को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में दिखाती है:
1. घंटे – एक दिन में कुल 24 घंटे होते हैं2. मिनट – हर घंटे में 60 मिनट
3. सेकंड – हर मिनट में 60 सेकंड
सरल शब्दों में कहें तो घड़ी हमारे जीवन को अनुशासन में रखने का काम करती है। अगर घड़ी न हो, तो न समय पर काम होगा और न ही दिनचर्या सही ढंग से चल पाएगी।
घड़ी की ज़रूरत क्यों पड़ी?
आज से सैकड़ों साल पहले लोगों के पास घड़ी नहीं थी। तब समय जानने के लिए लोग सूरज, चाँद और तारों पर निर्भर रहते थे। सुबह सूरज निकलने को दिन की शुरुआत और सूरज डूबने को शाम माना जाता था।
लेकिन जैसे‑जैसे समाज आगे बढ़ा, व्यापार, यात्रा और कामकाज बढ़े, वैसे‑वैसे समय को सही तरीके से जानना ज़रूरी हो गया। यहीं से घड़ी जैसी चीज़ की ज़रूरत महसूस की गई।
घड़ी का इतिहास | History of Watch
घड़ी का इतिहास बहुत पुराना और दिलचस्प है। शुरुआत में समय मापने के लिए सूर्य घड़ी (Sundial) का उपयोग किया जाता था, जिसमें सूरज की छाया देखकर समय का अनुमान लगाया जाता था। इसके बाद जल घड़ी और रेत घड़ी का इस्तेमाल भी हुआ।
लगभग 996 ईस्वी में पहली यांत्रिक घड़ी का विकास हुआ। इस घड़ी का श्रेय पोप सिलवेस्टर द्वितीय (Pope Sylvester II) को दिया जाता है। यह घड़ी वजन और गियर सिस्टम पर आधारित थी।
1. एक भारी वजन होता था, जो धीरे‑धीरे नीचे गिरता था
2. एक एस्केपमेंट सिस्टम होता था, जो गति को नियंत्रित करता था
शुरुआत में इन घड़ियों का इस्तेमाल चर्चों में घंटियाँ बजाने के लिए किया जाता था, ताकि लोगों को प्रार्थना के समय का पता चल सके।
यूरोप में घड़ियों का विकास
13वीं शताब्दी के बाद यूरोप में घड़ियों का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ने लगा। चर्च, राजमहल और सार्वजनिक इमारतों में बड़ी‑बड़ी घड़ियाँ लगाई जाने लगीं।
इस दौरान घड़ी निर्माण में कई बड़े सुधार हुए:
1. पेंडुलम तकनीक – जिससे घड़ी ज़्यादा सटीक चलने लगी2. दांतदार गियर सिस्टम – समय मापने में सुधार हुआ
3. धातु के पुर्ज़े – घड़ियाँ पहले से ज़्यादा मज़बूत बनीं
इटली और जर्मनी के शहर घड़ी निर्माण के बड़े केंद्र बन गए। यहाँ के कारीगरों की बनाई घड़ियाँ पूरी दुनिया में मशहूर होने लगीं।
पहली पोर्टेबल घड़ी का आविष्कार?
शुरुआती घड़ियाँ बहुत बड़ी होती थीं और उन्हें एक ही जगह लगाया जाता था। लेकिन 1505 ईस्वी में जर्मनी के पीटर हेनलिन ने पहली पोर्टेबल घड़ी बनाई। इसे न्यूरमबर्ग एग कहा गया।
इस घड़ी की खास बातें थीं:-
1. आकार में छोटी और अंडे जैसी2. लोहे की मजबूत बॉडी
3. स्प्रिंग सिस्टम से चलने वाली
4. लगभग 40 घंटे तक चलने की क्षमता
यह घड़ी जेब में रखी जा सकती थी, इसलिए यह आम लोगों के लिए भी उपयोगी बन गई।
मिनट वाली सुई का आविष्कार किसने किया था?
पहले की घड़ियाँ केवल घंटे ही दिखाती थीं। लेकिन समय के साथ लोगों को और सटीक समय की ज़रूरत पड़ी।
1577 ईस्वी में स्विट्ज़रलैंड के घड़ीसाज़ जोस्ट बर्गी ने मिनट वाली सुई का आविष्कार किया। इसके बाद घड़ियाँ घंटे के साथ‑साथ मिनट भी दिखाने लगीं।
1. समय मापने की सटीकता बढ़ी
2. लोगों की दिनचर्या और बेहतर हुई
घड़ी कितने प्रकार की होती है? How many types of watchesआज के समय में घड़ियाँ कई प्रकार की मिलती हैं, जो निम्नलिखित है -
1 - यांत्रिक घड़ी (Mechanical Watch)
यह घड़ी बिना बैटरी के गियर और स्प्रिंग से चलती है।
2 - क्वार्ट्ज घड़ी (Quartz Watch)
यह बैटरी से चलती है और काफ़ी सटीक होती है।
3 - डिजिटल घड़ी (Digital Watch)
इसमें समय अंकों में दिखाई देता है।
4 - स्मार्टवॉच (Smart Watch / Wearable Device)
यह सिर्फ समय ही नहीं, बल्कि
1. हार्ट रेट
2. स्टेप काउंट
3. कॉल और मैसेज नोटिफिकेशन
4. फिटनेस ट्रैकिंग जैसी सुविधाएँ भी देती है।
भारत में समय मापन की प्राचीन विधियाँ
भारत में भी समय मापन की एक समृद्ध परंपरा रही है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण जंतर‑मंतर है, जिसे महाराजा जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था।
1. यहाँ सूर्य की छाया से:
2. समय
3. ग्रहों की स्थितिनक्षत्रों की चाल का पता लगाया जाता था।
निष्कर्ष | Conclusion
घड़ी केवल समय बताने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन को अनुशासित और व्यवस्थित बनाती है। प्राचीन सूर्य घड़ियों से लेकर आज की स्मार्टवॉच तक, घड़ी का सफर मानव विकास की कहानी बताता है।
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लेखक: Sameem Ali
